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मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना

सॉयल हेल्थ कार्ड स्कीम | Soil Health Card Scheme

सॉयल हेल्थ कार्ड स्कीम | Soil Health Card Scheme

मृदा स्वास्थ्य कार्ड स्कीम समूचे देश में चलाई जा रही है। इसका उद्देश्य एक डाटा तैयार करना है कि देश की मृदा की स्थिति क्या है। किन राज्यों में किन पोषक तत्वों की कमी है। सरकार की मंशा है कि राज्यों की स्थिति के अनुरूप किसानों तक उर्वरकों की पहुंच आसान और सुनिश्चत की जाए ताकि उत्पादन में इजाफा हो सके। किसानों की माली हालत में भी सुधार हो सके। राज्य सरकार के कृषि विभाग की मदद से मृदा नमूनों का संकलन, परीक्षण एवं इसे आनलाइन अपलोड करने का काम पूरे देश में चरणबद्ध तरीके से कराया जा रहा है। यह योजना कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय  भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही है। सॉयल हेल्थ कार्ड का उद्देश्य प्रत्येक किसान को उसके खेत की सॉयल के पोषक तत्वों की स्थिति की जानकारी देना है।

  soil health card 1 

 यह एक प्रिंटेड रिपोर्ट है जिसे किसान को उसके प्रत्येक जोतों के लिए दिया जायेगा। इसमें 12 पैरामीटर जैसे एनपीके (मुख्य - पोषक तत्व), सल्फर (गौण – पोषक तत्व), जिंग, फेरस, कॉपर, मैग्निश्यम, बोरॉन (सूक्ष्म – पोषक तत्व), और इसी ओसी (भौतिक पैरामीटर) के संबंध में उनकी सॉयल की स्थिति निहित होगी। इसके आधार पर एसएचसी में खेती के लिए अपेक्षित सॉयल सुधार और उर्वरक सिफारिशों को भी दर्शाया जायेगा। यह कार्ड आगामी फसल के लिए जरूरी पोषक तत्वों की जानकारी भी देता है। यह बात अलग कि मृदा नमूना लेने का काम क्षेत्र विशेष में ग्रिड बनाकर किए जा रहा है। इससे मोटा मोटी अनुमान लग जाता है कि किस इलाके में कौनसे पोषक तत्वों की कमी है। 

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 सवाल यह उठता है कि क्या किसान प्रत्येक वर्ष और प्रत्येक फसल के लिए एक कार्ड प्राप्त करेंगे। यह कार्ड 3 वर्ष के अंतराल के बाद उपलब्ध कराया जाएगा। सॉयल नमूने जीपीएस उपकरण और राजस्व मानचित्रों की मदद से सिंचित क्षेत्र में 2.5 हैक्टर और वर्षा सिंचित क्षेत्र में 10 हैक्टर के ग्रिड से नमूने लिए जा रहे हैं। नमूनों का संकलन सरकारी कर्मचारी, कालेज स्टूडेंट, एनजीओ वर्कर आदि किसी भी माध्यम से संकलित कराए जाते हैं। नमूनों का संकलन खाली खेतों में आसानी से हो जाता है। 

नमूना लेने का तरीका समझें किसान

soil namuna 

 सॉयल नमूने V आकार में मिट्टी की कटाई के उपरांत 15 – 20 सेण्टी मीटर की गहराई से निकालने चाहिए। किसान भी यह काम कर सकते हैं। नमूना कभी मेंड की तरफ से नहीं लेना चहिए। नमूने को समूचे खेत से संकलित करना चहिए ताकि समूची मृदा का प्रतिनिधित्व हो और जांच ठीक हो सके। अच्छा हो कि किसी जानकार या कृषि विभाग के व्यक्ति से नमूना लेने का तरीका समझ लिए जाए।  छाया वाले क्षेत्र से नमूना न लिया जाए। चयनित नमूने को बैग में बंद करके खेत की पहचान वाली पर्ची डालकर ​ही दिया जाए। इसके बाद ही नमने को जांच के लिए भेजा जाए। नमूनों में तीन मुख्य तत्वों की जांच तो हर जनपद स्तर पर हो जाती है लेकिन शूक्ष्म पोषक तत्वों की जांच मण्डल स्तीर प्रयोगशालाओं पर ही होत पाती है। इस परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर ही कार्ड बनाकर जनपदों को भेजे जाते हैं। इसके बाद यह किसानों में वितरित होते हैं। किसान अपनी मिट्टी की जांच कई राज्यों में नि:शुल्क या महज पांच सात रुपए की दर से कराई जा सकती है।

22 करोड़ से ज्यादा किसानों को बांटे गए सॉइल हेल्थ कार्ड, जानिए क्यों है ये इतने महत्वपूर्ण

22 करोड़ से ज्यादा किसानों को बांटे गए सॉइल हेल्थ कार्ड, जानिए क्यों है ये इतने महत्वपूर्ण

5 दिसम्बर को विश्व मृदा दिवसकृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने जानकारी साझा करते हुए बताया है, कि अभी तक देश में 22 करोड़ से ज्यादा किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड बांटे जा चुके हैं। इसके साथ ही कृषि मंत्री तोमर ने अपने ट्विटर अकाउंट से जानकारी दी कि सॉइल हेल्थ कार्ड वितरण के कार्य को आसान बनाने के लिए देश में 500 सॉइल टेस्ट लैब, मोबाइल सॉइल टेस्ट लैब, 8811 मिनी सॉइल टेस्ट लैब और 2395 ग्रामीण स्तर पर सॉइल टेस्ट लैब बनाई गई हैं। 

इस प्रकार से की जाते हैं मिट्टी की जांच

आज के युग में मिट्टी की जांच बेहद महत्वपूर्ण कार्य है। अच्छी उपज के लिए मिट्टी के स्वास्थ्य की जानकारी होना बेहद आवश्यक है। मिट्टी की जांच के द्वारा यह पता करने में आसानी होती है, कि मिट्टी में किसी भी प्रकार के पोषक तत्वों की कमी तो नहीं है। यदि मिट्टी में पोषक तत्वों की किसी भी प्रकार की कमी पाई जाती है, तो यथाशीघ्र उस कमी को दूर किया जा सकता है।

 विशेषज्ञों के अनुसार, मिट्टी की क्वालिटी जांचने के 12 पैरामीटर्स होते हैं। इन पैरामीटर्स में मिट्टी में मौजूद अलग-अलग पोषक तत्वों की पहचान की जाती है। मिट्टी में N, P, K, S, Zn, Fe, Cu, Mn, PH, EC, OC और Bo जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। मृदा की जांच के दौरान मिट्टी में इन सभी पोषक तत्वों की उपलब्धता के बारे में जानकारी प्राप्त हो जाती है। 

ऐसे बनवाएं सॉइल हेल्थ कार्ड

सॉइल हेल्थ कार्ड बनवाने के लिए किसान भाई मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की ऑफिशियल वेबसाईट soilhealth.dac.gov.in पर जाकर बेहद आसानी से अपना सॉइल हेल्थ कार्ड बनवा सकते हैं। जैसे ही, किसान भाई अपना सॉइल हेल्थ कार्ड बनवा लेते हैं, वैसे ही अधिकारी किसान के खेत पर आकार लैब में जांच के लिए सैंपल ले जाते हैं। इसके बाद सैंपल की गुणवत्ता की जांच मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में की जाती है। सभी जांच होने के बाद अधिकारी मिट्टी के स्वास्थ्य को लेकर एक रिपोर्ट बनाते हैं, जिसे मृदा स्वास्थ्य कार्ड कहा जाता है।

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अब इस मृदा स्वास्थ्य कार्ड को किसान भाई ऑनलाइन भी डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें सॉइल हेल्थ कार्ड स्कीम की ऑफिशियल वेबसाइट soilhealth.dac.gov.in पर जाना होगा। जहां फार्मर्स कॉर्नर के सेक्शन पर जाकर प्रिन्ट सॉइल हेल्थ कार्ड पर क्लिक करके मृदा स्वास्थ्य कार्ड बेहद आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है।